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Uski Masrufiyat Mera Intzaar

सब उसकी., मसरूफियत में शामिल हैं...!! बस एक ., मुझ  बे-ज़रूरी के सिवा.....!! #Uski Masrufiyat 

रस्मे उल्फत को - Hindi Shayari of Life

रस्मे उल्फत को निभाए तो निभाए कैसे,
हरतरफ आग है ,दामन को बचाए कैसे।
बोझ होता जो गमों का तो उठा भी लेते,
जिंदगी बोझ बनी तो फिर उठाए कैसे।

Comments

  1. आप के शायरी पेज को देख दिल के अरमान दुबारा जाग गए अगर आप फिल्मो और गानो का शौकीन है तो जरूर क्लिक करे http://www.guruofmovie.com

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