Maan Mandir Mein - Radhe Krishan

बैठा के तुम्हें मन मंदिर में,
मनमोहनी रूप निहारा करूँ।
भर के दृग पात्र में प्रेम का जल,
पद पंकज नाथपखारा करुँ।।

बन प्रेम पुजारिन तुम्हारी प्रभु,
नित आरती भव्य उतारा करूँ।
तुम अयोग्य जान बिसराओ मुझे,
पर मै ना तुम्हे बिसराया करूँ।।

गुणगान करूँ नित ध्यान धरुं 
तुम मान करो मैं मनाया करूँ।
तेरे पदपंकज की धूल,
नित शीश पे अपने धरा करूँ।।

तेरे प्यारो से प्यार करुँ मैं  सदा,
तेरे चाहने वालो को चाहा करूँ।
बैठा के तुम्हें मन मंदिर में,
मनमोहिनी रूप निहारा करूं।।

Radha Krishan Shayari

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