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तेरे दर पर

तेरे दर तक आ पहुंचे हम….!! अपना पीछा करते-करते….!!

गिले शिकवे - Gile-Shikve

गिले-शिकवों का भी कोई अंत
नहीं साहब ..

पत्थरों को शिकायत ये कि पानी की मार से टूट रहे हैं हम...

और पानी का गिला ये है कि पत्थर हमें खुलकर बहने नहीं देते..!!

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