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Uski Masrufiyat Mera Intzaar

सब उसकी., मसरूफियत में शामिल हैं...!! बस एक ., मुझ  बे-ज़रूरी के सिवा.....!! #Uski Masrufiyat 

कहीं दिन उगा - Safar Shayari

कहीं दिन उगा - Safar Shayari

कहीं दिन उगा तो कहीं रात हो गयी,
कभी कुछ न बोले, कभी बात हो गयी,
कहीं दूर तलक न साये दिखे,
कहीं दूर सफर तक साथ हो गयी,
कभी डरती डरती चली थी सफर में,
अब चलते चलते  बेबाक हो गयी..

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