आरजू मुलाकात की

aarzoo shayari

आरजू तमाम पिघलने लगी हैं,
लो और एक शाम फिर से ढलने लगी है,
हसरत-ए-मुलाकात का शौक है बस,
ये ज़िद भी तो हद से गुजरने लगी है |

Comments

  1. ढूंढना ही है तो परवाह करने वालों को ढूंढ़िये
    इस्तेमाल करने वाले तो ख़ुद ही आपको ढूंढ लेंगे ||

    Andaaz-E-Shayari.com

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