03 August, 2018

दुआ शब्द पर शायरी

दुआ शब्द पर शायरी

'दुआ' शब्द पर बेहतरीन शायरी संग्रह। उम्मीद है आपको पसंद आऐगा ।

दुवा‬ करो वो मुझको मिल जाए यारो...
‪सुना‬ है ‪दोस्तों‬ की ‪दुआ‬ में
फरिश्तों की ‪‎आवाज़‬ होती है

जब माँ छोड़कर जाती है
तब दुनिया में कोई दुआ देने वाला नहीं होता..
और जब पिता छोड़कर जाता है
तब कोई हौसला देने वाला नहीं होता..

मेरी इबादतों को ऐसे कबूल कर ऐ मेरे.खुदाकि सजदों में मैं झुकूँ !
और..मुझसे जुड़ेहर रिश्ते की.ज़िन्दगी संवर जाए !!

दुआ कौन सी थी बस याद नही दो हथेलीयां
जुङी थी एक तेरी थी एक मेरी !!

हर सुबह तु मुस्कुराती रहे हर शाम तु गुनगुनाती रहें !
मेरी दुआ हैं की तू जिसे भी मिलें हर मिलने वाले को तेरी याद सताती रहें !!

धागा ही समझ, तू अपनी "मन्नत" का मुझे
तेरी दुआओ के मुकम्मल होने का दस्तूर हूँ मैं.

कामयाबी के हर शिखर पर तुम्हारा नाम होगा,
तुम्हारे हर कदम पर दुनिया का सलाम होगा,
हिम्मत से मुश्किलों का सामना करना दोस्त,
दुआ है कि वक़्त एक दिन तुम्हारा गुलाम होगा।

हम दुआओं में दिल से दुआ करते हैं,
हाथ फैलाये रब से इल्तज़ा करते हैं,
उन पर गम का साया न आने पाए,
जो दिल से हमें अपना कहा करते हैं।

न जाने किसने पढ़ी है मेरे हक़ में दुआ,
आज तबियत में जरा आराम सा है।

जब कभी दिल दुआ देगा,
तो नफरत को मिटा देगा,
ये बेचारा इंसान क्या देगा,
जो भी देगा खुदा देगा।

तुम्हारे प्यार की दास्तां हमने अपने दिल में लिखी है,
न थोड़ी न बहुत बे-हिसाब लिखी है,
किया करो कभी हमे भी अपनी दुआओं में शामिल,
हमने अपनी हर एक सांस तुम्हारे नाम लिखी है।

तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती,
मगर है इस से यह मुमकिन कि तू बदल जाये,
तेरी दुआ है कि हो तेरी आरज़ू पूरी,
मेरी दुआ है तेरी आरज़ू बदल जाये।

भूल न जाऊं माँगना उसे हर नमाज़ के बाद,
यही सोच कर हमने नाम उसका दुआ रक्खा है।

लौट आती है हर बार मेरी दुआ खाली,
जाने कितनी ऊँचाई पर खुदा रहता है।

मेरे अश्को से तू अपना दामन साफ कर
अकेले तड़पता हूँ ऐ खुदा इन्साफ कर
उनकी बेवफाई में कुछ राज छुपा है
मेरे खुदा तू उनके हर गुनाह माफ़ कर

पलभर की भी तन्हाई तुम्हें नसीब ना हो,
कोई भी गम तुम्हारे करीब ना हो,
रब तुम्हारी ज़िन्दगी में इतनी खुशियाँ दे,
कि तुमसे बढ़कर कोई खुशनसीब ना हो..

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