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तेरे दर पर

तेरे दर तक आ पहुंचे हम….!! अपना पीछा करते-करते….!!

मेरी मोहब्बत से आज

मेरी मोहब्बत से आज

मेरी मोहब्बत से आज इतनी अनजान क्यों है
देकर जख्म मुझको इतनी नादान क्यों है
पल पल जिंदा हूं तेरी यादों के सहारे
मुझे जिंदा देखकर इतनी परेशान क्यों है

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