24 मार्च, 2016

शिक्षक - Teacher's Day Shayari

सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।
नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ ।।
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
और मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ ।।
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।

1 टिप्पणियाँ:

  1. सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।
    नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।
    चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
    तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ ।।
    समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
    और मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ ।।
    बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।
    अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।


    Very nice

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