22 October, 2015

फौज में मौज - Life in Army by Shayari

फौज में मौज - Life in Army by Shayari
फौज में मौज हैँ,
हजार रूपये रोज है...
थोड़ा सा गम है,
इसके लिए भी रम है...
लाइफ थोड़ी रिस्की है,
इसके लिए तो विस्की है...
खानें के बाद फ्रुट है,
मरनें के बाद सैलूट है...
पहनने के लिए ड्रैस है,
ड्रैस में जरूरी प्रेश है...
सुबह-२ पी.टी है,
वॉर्निंग के लिए सीटी है...
चलने के लिए रूट है,
पहनने के लिए D.M.S बूट है...
खाने के लिए रिफ्रैशमेंन्ट है,
गलती करो तो पन्सिमेंन्ट है...
जीते-जी टैंन्सन है;
मरनें के बाद पैंन्शन है...|
||  जयहिंद ||

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