22 October, 2015

फौज में मौज - Life in Army by Shayari

फौज में मौज - Life in Army by Shayari
फौज में मौज हैँ,
हजार रूपये रोज है...
थोड़ा सा गम है,
इसके लिए भी रम है...
लाइफ थोड़ी रिस्की है,
इसके लिए तो विस्की है...
खानें के बाद फ्रुट है,
मरनें के बाद सैलूट है...
पहनने के लिए ड्रैस है,
ड्रैस में जरूरी प्रेश है...
सुबह-२ पी.टी है,
वॉर्निंग के लिए सीटी है...
चलने के लिए रूट है,
पहनने के लिए D.M.S बूट है...
खाने के लिए रिफ्रैशमेंन्ट है,
गलती करो तो पन्सिमेंन्ट है...
जीते-जी टैंन्सन है;
मरनें के बाद पैंन्शन है...|
||  जयहिंद ||

1 comments:

  1. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🎈 जय माँ सरस्वती 🎈🙏🙏🙏🙏🙏🙏
    खेलो फ़ाग , आँख मिचोली|
    आई रै होली,आई रै होली ||
    ~~~~~~~~~~~~~~
    भाई भाई क़ै, रंग लगाइयो ।
    भर पिचकारी , भाभी नै नवाइओ ।।
    मारूँगी कोरडा,भाभी न्यू बोली।
    आई रै होली, आई रै होली।।
    ~~~~~~~~~~~~~~
    ~~~~~~~~~~~~~~
    कदे कीचड़ मै,कदे गोबर मै दसाइयो ।
    गेर नाली मै, पकड़ कॉलर रेल बनाइयो ।।
    भाभी भाजी आगे तै, पकड़ी रै चोली।
    आई रै होली, आई रै होली।।
    ~~~~~~~~~~~~~~~
    ~~~~~~~~~~~~~~~
    आवै साल मै एक बार , खूब लियो नजारा ।
    बींनू बस्तलि नै पकड़ सोनू ,ऊपर गेरया गारा ।।
    भर कै गोजी रंग की, चाल पड़ी रै टोली।
    आई रै होली, आई रै होली।।
    ~~~~~
    ~~~~~
    लेखक :- बींनू बस्तलि
    8569997474

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