16 October, 2014

Ankhon Mein Ashak - My Style in Shayari

आँखों में अश्क लबों पे मुस्कान रखता हूँ
सब बचके निकलते हैं,ये पहचान रखता हूँ,
कोई बुलाता नहीं ख्वाब में भी गम नहीं
अपने सीने में हज़ारों मेहमान रखता हूँ,
यह जमाना जान नहीं पाया है आज तक
मैं अपने किरदार में नेक इंसान रखता हूँ,
नहीं देना कोई सबूत देशभक्ति का मुझको
अपने दिल में हमेशा हिन्दुस्तान रखता हूँ,
नाराज़ रहते हैं नकली चेहरा लगाने वाले
झूँठों को सदा बहुत मैं परेशान रखता हूँ,
उड़ जायेगी धूल लेखनी की राहों की
अपने अल्फ़ाज़ों में ऐसा तूफ़ान रखता हूँ-

1 comments:

  1. देखे दुनिया के सबसे बेहतरीन ब्लॉग में से एक ब्लॉग http://www.guruofmovie.com

    ReplyDelete