12 September, 2013

Ankho Me Yahi Sulagte Sawal

Ankho Me Yahi Sulagte Sawal
आँखों में यहीं सुलगते, सवाल खड़े हैं |
कुछ लोग हीं क्यों देश में , खुशहाल खड़े हैं ?
पैंसठ बरस के बाद भी, इन्साफ के लिए
क्यों आम लोग हीं यहाँ, फटेहाल खड़े हैं ?
कौड़ी का आदमी था ,संसद गया जबसे ,
सुना शहर में उसके, कई माँल खड़े हैं |
किस भाँति देश बेचना, तरकीब सोचते ,
पग-पग पे यहाँ देखिये, दलाल खड़े हैं |
कुर्सी की साजिशों का, परिणाम देखिये ,
सर्वत्र जाति-धर्म के, दीवाल खड़े हैं |
कैसे उगेगा प्यार का पौधा, बताइए ,
दिल में घृणा के बरगद, जब पाल खड़े हैं |

Poet Unknown

11 comments:

  1. आप के ब्लॉग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है देखे भारतीय सिनेमा की हर खबर एक क्लिक पर http://guruofmovie.blogspot.in/

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  2.   



     


       जमीर बेच के नफरत जगाते रहते हैं।
       लूह से प्यास वह अपनी बुझाते रहते है!
       जीन्हें पसंद नही हिन्दु मुसलमानों का मिलना
        वो जान बुझ के    दंगे     कराते    रहते है.!

                ♻ मोहम्मद सूएब अंसारी♻

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  3.    जमीर बेच के नफरत जगाते रहते हैं।
        लूह से प्यास वह अपनी बुझाते रहते है!
        जीन्हें पसंद नही हिन्दु मुसलमानों का मिलना
        वो जान बुझ के    दंगे     कराते    रहते है.!

                ♻ मोहम्मद सूएब अंसारी♻

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