03 February, 2013

बहुत दिनों से - (Hindi Shayari)

  बहुत दिनों से सोच रहा हूँ कोई गीत लिखूँ
    इतिहासों में मिले न जैसी, ऐसी प्रीत लिखूँ
  जो न अभी तक बजा, आज स्वर्णिम संगीत लिखूँ
    बहुत दिनों से सोच रहा हूँ मैं इक गीत लिखूँ

  प्रीत राधा की लिख डालूँ जिसे माना जग ने
    लिखूँ सुदामा ने खाईं जो साथ कॄष्ण के कसमें
  कालिन्दी तट कुन्ज लिखूँ, मैं लिखूँ पुन: वॄन्दावन
    और आज मैं सोच रहा हूँ डूब सूर के रस में

  बाल कॄष्ण के कर से बिखरा जो नवनीत लिखूँ
    बहुत दिनों से सोच रहा हूँ मैं इक गीत लिखूँ


1 comments:

  1. आप के ब्लॉग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है देखे भारतीय सिनेमा की हर खबर एक क्लिक पर http://guruofmovie.blogspot.in/

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