18 December, 2012

पत्थर समेटिये - Pathar Sametiye

Hindi Love Shayari - Pathar Sametiye
सपनो का अब निगाह से मंज़र समेटिये ..
 सूरज की आँख खुल गयी, बिस्तर समेटिये,
जब से गए हैं आप, बिखर सा गया हूँ मैं ..
 खो जाऊँगा हवाओं में, आकर समेटिये ,
दे दीजियेगा बाद में औरों को मशविरा ..
 फ़िलहाल अपना गिरता हुआ घर समेटिये,
फूलों की बात समझें, कहाँ हैं वो देवता ?
 ये दानवों का दौर है, पत्थर समेटिये ..!!

Sapno ka ab nigah se manzar sametiye,
Suraj ki ankh khul gai, bistar sametiye,
Jabse gaye hai aap, bikhar sa gaya hu mai,
Kho jaunga hawao me, akar sametiye,
De dejiyega baad me auro ko machvira,
Philhal apna girta hua ghar sametiye,
Phoolon ki baat samjhe, kha hai wo dewta?
Ye danavo ka dour hai, pathar sametiye..!!


1 comments:

  1. आप के ब्लॉग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है देखे भारतीय सिनेमा की हर खबर एक क्लिक पर http://guruofmovie.blogspot.in/

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