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Uski Masrufiyat Mera Intzaar

सब उसकी., मसरूफियत में शामिल हैं...!! बस एक ., मुझ  बे-ज़रूरी के सिवा.....!! #Uski Masrufiyat 

हक़ीक़त है

हक़ीक़त है या दिल को बहला रहा है,
सुना है ज़मीं पर खुद़ा आ रहा है।

जुदा कर न देना अदावत दिलों से,
अभी दुश्मनी में मज़ा आ रहा है।

बुरा वक़्त आया है कैसा लबों पर,
निगाहों से उनको छुआ जा रहा है।

मुझे खुदक़ुशी की ज़रूरत ही क्या है,
मेरा यार मेरी दवा ला रहा है।

पड़ोसी पड़ोसी के घर तक न पहुंचा,
सितारों से आगे जहाँ जा रहा है।

'मैं आऊंगा जब धर्म का नाश होगा',
वो कहता रहा पर कहाँ आ रहा है।

फ़रक़ कम या ज़्यादा का है सिर्फ़ 'पंकज',
जिसे देखो बारूद बरसा रहा है।

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