14 October, 2011

वफा के वादे - wafa ke waday



वफा के वादे वो सारे भूला गया चुप-चाप...
वो मेरे दिल की दिवारें हिला गया चुप-चाप...

ना जाने कौन सा वो बद-नसीब लम्हा था,
जो गम की आग में मुझ को जला गया चुप-चाप...

गम-ऐ-हयात के तपते हुए बया-बांन में..
हमें वो छोड के चला गया चुप-चाप...

मैं जिसको छुता हुँ वो जख्म देता है..
वो फुल ऐसा चमन में खिला गया चुप-चाप...
 


wafa ke waday wo saray bhula gya chup chap.....
wo mere dil ki dewaren hilla gya chup chap.....

na janay kon sa wo bad naseeb lamha tha....
jo gam ki aag main mujh ko jala gya chup chap....

gam-e-hayat k taptay hoe bayaban main.....
hamen wo chor k chala gia chup chap......

main jis ko chuta hon wo zakhm deta hai...
wo phool aisay chamann main khila gia chup chap....!!!!