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Uski Masrufiyat Mera Intzaar

सब उसकी., मसरूफियत में शामिल हैं...!! बस एक ., मुझ  बे-ज़रूरी के सिवा.....!! #Uski Masrufiyat 

क्यों इतना गमो से


क्यों इतना गमो से वास्ता रखने लगा हू,
खुद से ही क्यों जुदा होने लगा हुँ।

उस अनजान कि खातिर,  जान पहचान वालो से,
रकीबो सा रिश्ता रखने लगा हुँ।

इतना जिद्दी तो वो खुदा भी नहीं जिसने बनाया है उसे,
क्यों उसके लिए खुदा से रूठ रहा हुँ।

बहुत दूर है वो समझता है दिल मेरा,
क्यों पास लाने के लिए दिल से खेल रहा हुँ।

एक छोटी सी बात समझ नहीं पाता मन मेरा.
वो पराया है क्यों उसे अपना बनाने चला हुँ।

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