19 September, 2010

हौंसल्ले हो बुलन्द


हौंसल्ले हो बुलन्द तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे,

छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को हिला देंगे।

वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले,

हम बुलन्द हौंसल्लों के दम पर आसमां को झुका लेंगे।,



Honsle Ho Buland To Har Mushkil Ko Asan Bana Denge..

Choti Tehniyo Ki Kya Bisat, Hum Bargad Ko Hila Denge..

Wo Aur Hai Jo Baith Jate Hai Thak Kar Manzil Se Pehle..

Hum Buland Honslo K Dam Par Aasma Ko Jhuka Denge...

4 comments:

  1. वाह क्या बात कही है..
    हम बुलन्द हौंसल्लों के दम पर आसमां को झुका लेंगे।
    बहुत खूब

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  2. थैंकस .. वीना जी..

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