20 अप्रैल, 2010

रूठ जाओ कितना भी

रूठ जाओ कितना भी पर मना लेंगे हम..

दूर जाओ कितना भी बुला लेंगे हम..

दिल आखिर दिल है, समन्दर की रेत नही..

की लिख के नाम तेरा मिटा देंगे हम..

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