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तेरे दर पर

तेरे दर तक आ पहुंचे हम….!! अपना पीछा करते-करते….!!

माना की कल हम




माना की कल हम अकेले रह गऐ..

जुदाई के आँसू आँखों से बह गऐ..

रोते हुऐ को कोन चुप कराऐगा..

जो चुप कराते थे वो ही आज चुप हो गऐ..




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