29 June, 2009

वो नगमे

खुदा से थोडा रहम खरीद लेते ।
आप के जखमो का महरम खरीद लेते ।
अगर कहीं बिकती खुशीयाँ मेरी ।
तो सारी बेचकर, आपका हर गम खरीद लेते ।


जाम पे जाम पीने से कया फाईदा,
शाम को पी सुबहा उतर जाऐगी ।
अरे दो बुंद दोस्ती की पी ले,
जिन्दगी सारी नशे मे गुजर जाऐगी ।


फिजा मे महकती एक शाम हो तुम ।
प्यार मे छलकता जाम हो तुम ।
सीने मे छुपाऐ फिरते हैं हम याद तुम्हारी,
मेरी जिन्दगी का दूसरा नाम हो तुम ।


तुम पास हो तो तुझ पे प्यार आता है,
तुम दुर हो तो तेरा इंतजार सताता है,
क्या कहें इस दिल की हालत क्या,
तुझे याद कर कर के हमे बुखार हो जाता है ।


वादे पे वो ऐतबार नही करते,
हम जिकरे महोब्बत सरे बाजार नही करते,
डरता है दिल उनकी रुसवाई से,
और वो सोचते है हम उनसे प्यार नही करते ।


काश वो नगमे हमे सुनाऐ ना होते,
आज उनको सुनकर आँसु आऐ ना होते,
अगर इसी तरह भुल ही जाना था,
तो इतनी गहराई से दिल मे समाऐ ना होते ।


हर खुशी कम है,
तेरा गम भुलाने के लिए,
एक तेरा गम ही काफी है,
उमर भर रुलाने के लिए ।


उनकी बेवफाई पर वफा हम करेंगे,
याद को उनकी दिल से जुदा हम करेंगे,
इतना चाहा फिर भी यकीन नही,
ऐसी जिंदगी को जी कर क्या करेंगे ।


मेरे जीने के लिए तेरा अरमान ही काफी है,
दिल की कलम से लिखी ये ! दासतान ही काफी है,
तीरे-तलवार की तुझे क्या जरुरत ऐ-नाज़नी,
कतल करने के लिए तेरी मुस्कान ही काफी है ।