28 June, 2009

दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं

भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,

हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,

बात कहके तो कोई भी समझलेता है,

पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है...!