13 जून, 2009

हर किसी से रिश्ता बना कर रखना


अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को बसा कर रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते, खो ना जाना,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना

10 टिप्पणियाँ:

  1. स्वागत है।

    "खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।"
    काहे भाई ? अरे छिप कर रहना था तो ब्लॉगरी की दुनिया में क्यों आए? खूब लिखो, पढ़ो और पढ़ाओ। छुप्पा छुप्पी से क्या हासिल? ;)

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  2. Achchh laga
    bahut hi sundar hai.
    likhte rhiye
    meri shubhkamnaye..........

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  3. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी

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  4. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है.....
    अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना , .......
    उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
    अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना । .....
    छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
    फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना । .........
    रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
    अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना । ............
    बहुत बेहतरीन पंक्तियाँ.... गजब.

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  5. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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