इसीलिए मैं दोस्त बनाता हुँ..

 hindi shayari on Friendship.

रहता हुँ किराये की काया में,
रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाता हुँ...!
मेरी औकात है बस मिट्टी जितनी,
बात मैं महल मिनारों की कर जाता हुँ...
जल जायेगी ये मेरी काया ऐक दिन,
फिर भी इसकी खूबसूरती पर इतराता हुँ...!
मुझे पता है मैं खुद के सहारे श्मशान तक भी ना जा सकूंगा,
इसीलिए मैं दोस्त बनाता हुँ ...!!

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