20 June, 2016

तुम यहाँ धरती पर

World Without Borders for Birds, Read this Hindi Shayari
तुम यहाँ धरती पर लकीरें खींचते हो,
हम वहाँ अपने लिये नये आसमान ढूंढते हैं,
तुम बनाते जाते हो पिंजड़े पे पिंजड़ा,
हम अपने पंखों में नयी उड़ान ढूंढते हैं।

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