01 April, 2016

हम रात भर

हम रात भर समेटते रहे टुकड़े दिल के,
कल कोई तोड़ गया था यू गैरों से मिल के,
पूछ ही ना पाये , उनसे सबब बेरुखी का,
रह गये खामोश, अपने लवों को सिल के,

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