Ishq Shayari on Uljhi Sham




उलझी ‪‎शाम‬ को पाने की ज़िद न करो,
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो,
इस समंदर में ‪‎तूफ़ान‬ बहुत आते है,
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो।

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