31 March, 2014

Abke Es Kadar - Shayari

अबके इस कदर होली मनाओ यारो..
 ऊंच नीच का भेदभाव मिटाओ यारो..
तोड़कर मजहब की इन दीवारोँ को..
 मोहब्बत का गुलाल लगाओ यारो..
जुल्म ज्यादत्ति धोखा अब और नहीँ..
 चुनावी मेँढकोँ को थोड़ा चेताओ यारो..
नहीँ खेली जाएगी खूं की होली कभी..
 मिलकर ये कसम अब खाओ यारो..
क्रिसमस ईद होली सब एक ही तो है..
 मजहब के ठेकेदारोँ को ये बताओ यारो..
आफत के दौर से गुजर रहा है वतन,
 उठो इस मुल्क की साख को बचाओ यारो..
एक ही नूर से उपजे हैँ सब प्राणी..
 बशर्तेँ गले से सबको लगाओ यारो..
गीता कुरान बाईबल सब मेँ लिखा है..
 कभी दिल ना किसी का दुखाओ यारो..
अपने लिए तो पशु भी जीते हैँ दोस्तों,
 इन्सां हो तो इसांनियत पे चलके दिखाओ यारो..