03 March, 2013

Zindagi Ki Hindi Shayari - Teri Es Duniya

Zindagi Ki Hindi Shayari - Teri Es Duniya
तेरी इस दुनियां में ऐसा मंजर क्यों है ?
कही जखम तो कहीं पीठ पर खंजर क्यों है?
सुना है कि तू हर जर्रे-जर्रे में रहता है..
तो फिर जमी पर कहीं मस्जिद और मन्दिर क्यों है?
जब रहने वाले इस दुनियां के है तेरे ही बन्दे..
तो फिर कोई किसी का दोस्त और कोई दुश्मन क्यों है?
तू ही लिखता है जब सवका मुकद्दर...
तो कोई बदनसीब और कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यों है?


Teri es duniya me aisa manzar kyo hai?
kahi jakham to kahi pith par khanzar kyo hai?
suna hai ki tu jarre-jarre me rehta hai..
to phir jami par kahi mandir aur maszid kyo hai?
jab rahns wale es duniya k hai tere hi bande
to phir koi dost aur koi dushman kyo hai?
tu hi likhta hai jab sabka mukadar..
to koi badnasib aur koi sikandar kyo hai...?

1 comments:

  1. आप के ब्लॉग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है देखे भारतीय सिनेमा की हर खबर एक क्लिक पर http://guruofmovie.blogspot.in/

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