07 October, 2010

ना ज़मीन - Na zameen


ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए,





na zameen, na sitare, na chand, na rat chahiye,
dil me mere, basne vala kisi dost ka payar chahiye..

na dua, na khuda, na hatho me koi talwar chahiye,
musibat me kisi ek pyare sathi ka hatho me hath chahiye..

kahu na main kuch, samajh jaye wo sab kuch,
dil me uske, apne liye aise zazbat chahiye..

us dost k chot lagne par hum bhi do ansu bhane ka hak rkhe,
aur hamare un ansuon ko pochne wala usi ka rumal chahiye..

main to tayar hu har tufan ko tair kar par krne k liye,
bas sahil par intzar krta hua ek sacha dildaar chahiye..

ulajh si jati hai zindgi ki kishti duniya ki bich majhdhar me,
es bhawar se par utarne k liye kisi k naam ki patwar chahiye...

akele koi bhi safar katna mushkil ho jata hai,
mujhe bhi es lambe raste par ek adad hum-safar chahiye..

yu to 'Mitar' ka tamga apne naam k sath laga kar ghumta hu
par koi, jo kahe sache maan se aapna dost, aisa ek dost chahiye..

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