11 July, 2009

वो रुठे इस कदर

वो रुठे इस कदर की मनाया ना गया,

दुर इतने हो गऐ की पास बुलाया ना गया,

दिल तो दिल था समुन्द्र का साहील नही,

लिख दिया नाम तो फिर मिटाया ना गया ।

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